फोर्टिस अस्पताल ने ब्रोंकोस्कोपी से 65 वर्षीय महिला के फेफड़ों के कैंसर का पता लगाया

बेंगलुरु : फोर्टिस अस्पताल बैनरघट्टा रोड ने कर्नाटक में नेविगेशन आधारित ब्रोंकोस्कोपी और फेफड़े की बायोप्सी करके चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। इससे 65 वर्षीय महिला में फेफड़े के कैंसर के संदेह का प्रारंभिक निदान संभव हो सका। यह प्रक्रिया इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी टीम द्वारा फुजीफिल्म के सिनेप्स 3डी नेविगेशन सिस्टम का उपयोग करके की गई, जो अपनी तरह की पहली उन्नत तकनीक है। टीम का नेतृत्व इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी और फेफड़े प्रत्यारोपण विभाग के निदेशक डॉ. श्रीवत्स लोकेश्वरन ने किया।मरीज को शुरुआत में खांसी और बुखार था और श्वास नली के संक्रमण का इलाज चल रहा था। जांच के दौरान एक्स-रे में एक असामान्यता के बाद चिकित्सक ने सीटी स्कैन कराने का सुझाव दिया। स्कैन में फेफड़े में नोड्यूल पाया गया, जो संदिग्ध प्रतीत हुआ और पुष्टि के लिए बायोप्सी की।फेफड़ों के नोड्यूल्स का नमूना सीटी-गाइडेड ट्रांसथोरेसिक नीडल बायोप्सी द्वारा लिया जाता है, लेकिन इसमें अक्सर फेफड़े के सिकुड़ने और रक्तस्राव जैसे जोखिम जुड़े होते हैं, परिणामस्वरूप अस्पताल में अधिक समय तक रहना पड़ता है और खर्च भी बढ़ जाता है। हालांकि यह बेहद दुर्लभ है, लेकिन सैद्धांतिक रूप से यह जोखिम रहता है कि फेफड़े की बायोप्सी के दौरान ट्यूमर में सुई डालने से कुछ कैंसर कोशिकाएं निकलकर सुई के मार्ग में जमा हो सकती हैं, जिसे ‘ट्यूमर सीडिंग’ कहा जाता है।फोर्टिस में, डॉक्टरों ने नेविगेशन-आधारित ब्रोंकोस्कोपी का उपयोग किया, जिसमें छाती चीरने के बजाय श्वास नील से बायोप्सी की जाती है। इससे अधिक सटीकता, कम जोखिम और बेहतर रोगी सुरक्षा सुनिश्चित होती है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *